ख़ता करना हमारे ज़िम्मे ही तो था
रुसवा हम हो भी तो क्या फरियाद करना हमारे ज़िम्मे ही तो था
हम कह दे अगर चाँद की ख़ूबसूरती का जवाब नहीं
उसके दाग को नज़रअंदाज़ करने का गुनाह कोई कम तो नहीं था
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मुझे मत दिखा दुनियाँ की असली तस्वीर ऐ दोस्त
कवि हूँ, आँखों पे धुंध का चश्मा लगा के ही में जी पाया हूँ
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रोशनी और उजालों में फ़र्क है ए दोस्त
एक अंधेरा मिटाती है और एक सुबह लाती है
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इसी कश्मकश में हम ख़ुश रहने से चूक गए
कि उजाला सुबह लता है या सुबह उजाला लाती है
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अपने वज़ूद को पुरिसरार की चादर से हमने घेरे रखा है
थोड़ा झलकने दिया और थोड़ा ओढ़े रखा है
फ़िर छोड़ दिया ज़माने पर हमें बुझने का काम
चैन से हम जीते हैं और ज़माने को बेचैनी में छोड़े रखा है
पुरिसरार=mystery
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ख़ुश रहने की बात दोस्त तुम तो रहने दो
हम तो मायूसी में भी जशन मन ले पर तुम हमें जीने तो दो
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छोटी सी तो बात थी
तुमने बतंगड़ बना के रख दिया
एक सुबह थी एक रात थी
तुमने बतंगड़ बना के रख दिया
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सफ़ेद आँचल से ढका ये तालाब
न जाने क्या राज छुपता है
बाहर तो दिखता है साक़ित और सर्द
अंदर मछलियों का पूरा शहर बसता है
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