Thursday, 25 January 2018

बस इतना ही था साथ लिखा
जो छूट गया सब यादें है
कुछ दिल में बसा के रखा जो 
कुछ किस्से हैं कुछ बातें है


कुछ खुशियाँ थीं , कुछ आसूँ थे
कभी लड़ते थे, कभी साथी थे

पर फिर भी जब मुड के देखा,
वो हाथ कंधों पर रहता था
लाखों गलतियाँ करे मगर,
 'तू यार है अपना' कहता था

कदम चाहे मना कर जाए,
दोस्ती खींचे ले जाती थी
कही-सुनी कड़वी बातें
मीलों पीछे रह जाती थीं

पर आज मुड़ के देखा तो
वो हाथ नही वो साथ नही
खाली है वो रोशन गालियाँ
वो जश्न नही वो रात नही

जम से गए हैं कदम वहीं
पर वो लौट के आने वाला  यार नही
अपने ही हाथों से पोछे आँसू
उम्मीद बची इस बार नही

अब आहे भरकर टूटे दिल को
हम ही ये दिलासा देते हैं
वो 'मैं-मैं' पर चाहे अड़ा रहे
हम आज भी दोस्ती जीते हैं

उन कसमो को उन वादों को
हम आज भी ज़िंदा रखते हैं
तू एक बार तो आवाज़ लगा
तेरी यारी पे जान छिड़कते हैं

बिछड़ी अपनी जो राहें अब
सब वक़्त की लिखी कहानी है
चल दिए तुम भी, चल देंगे हम भी
ज़िन्दगी यूँ ही चलती जानी है

दिल में बसे अरमानों को
अब इतना सा  बस कहना है
के इतना ही था साथ लिखा
जो छूट गया सब यादें है
कुछ दिल में बसा के रखा जो
कुछ किस्से हैं कुछ बातें है

||Sshree||


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