Monday, 22 January 2018

एक दिन तेरी ख़ुदाई के चर्चे हज़ारों  होंगे
सूरत ही नहीं सीरत पर भी मरते लोग होंगे
तू मुस्का देगा अपनी तारीफों का शोर सुन के
चर्चे तो ख़ूब होंगे पर हम नहीं होंगे

ज़माने को तो तू नया सा नज़र आएगा
तेरे उजालों से तू उनके लिए नया सवेरा लाएगा
जब तेरे आँगन में रोशन चिराग हर रंग के होंगे 
चर्चे तो ख़ूब होंगे पर हम नहीं होंगे

क़ामयाबी में अपनी सारी खुशियाँ तो तू मानेगा
पर उसको अपनी शोहरत नहीं हमारी देनगी जानेगा
कदम इस ओर मुड़े फिर भी फासले कम नहीं होंगे
चर्चे तो ख़ूब होंगे पर हम नहीं होंगे

तेरी दुनियाँ से दूर कहीं हम होंगे ज़ख़्मों में खोए
जैसे पत्थर तो हीरा बने पर हथौड़ी सिर्फ़ टेढ़ी होए
तेरी फ़ुर्कत में दिलों के ग़म  कम तो ना होंगे
फिर  भी चर्चे तो ख़ूब होंगे पर हम नहीं होंगे

||Sshree|| 

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