Friday, 3 November 2017

कभी हसाती  हैं कभी रुलाती हैं 
पर यादें इतनीआसानी से 
भुलाई भी तो नहीं जाती हैं 

चुपके से दिल पर दस्तक़ दे कर 
जाने कब वो वहीं  घर कर जाती हैं 
धुंधले चेहरों और बिसरि बातों में 
मानो दुनियाँ तुम्हारी वहीं थम सी जाती है 

कल के बंद दरवाजे तभी  चीख के तुम्हें बुलाते हैं 
मन ही मन मुस्कुराते हुए 
आँसू भी भर से आते हैं 
मूड कर उन्हें देखने के लिए भी 
कुछ लम्हें कम  पड़ जातें हैं 
मुश्किल तो बहुत  होती है 
पर आँखें सीधी  कर बेबस कदम फिर आगे बढ़ जाते है 

वो ज़ोरो से जकड़ी हुई मुट्ठी शायद 
कल को जितना हो सके जकड़ना चाहती है 
वो रेशम से एहसास और कही-अनकही बातें 
इस मुश्किल सफर में बस वही अपने साथी हैं 

रह रह कर यूँ उन लम्हों को फिर से जीने की कसक 
मन को यूँ हर पल तरसती है 
पर यादें इतनी आसानी से 
भुलाई भी तो नहीं जाती हैं 

||Sshree|| 

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