कभी हसाती हैं कभी रुलाती हैं
पर यादें इतनीआसानी से
भुलाई भी तो नहीं जाती हैं
चुपके से दिल पर दस्तक़ दे कर
जाने कब वो वहीं घर कर जाती हैं
धुंधले चेहरों और बिसरि बातों में
मानो दुनियाँ तुम्हारी वहीं थम सी जाती है
कल के बंद दरवाजे तभी चीख के तुम्हें बुलाते हैं
मन ही मन मुस्कुराते हुए
आँसू भी भर से आते हैं
मूड कर उन्हें देखने के लिए भी
कुछ लम्हें कम पड़ जातें हैं
मुश्किल तो बहुत होती है
पर आँखें सीधी कर बेबस कदम फिर आगे बढ़ जाते है
वो ज़ोरो से जकड़ी हुई मुट्ठी शायद
कल को जितना हो सके जकड़ना चाहती है
वो रेशम से एहसास और कही-अनकही बातें
इस मुश्किल सफर में बस वही अपने साथी हैं
रह रह कर यूँ उन लम्हों को फिर से जीने की कसक
मन को यूँ हर पल तरसती है
पर यादें इतनी आसानी से
भुलाई भी तो नहीं जाती हैं
||Sshree||
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