Friday, 3 November 2017

पहली बारिश की ये ठंडक 
दे जाती है दिल पे अनदेखी सी दस्तक 
ये मदमस्त फुहारें 
दे जाती हैं दिल को बहारें 

ना जाने क्या कहती है ये बारिश 
क्यों  लगती है इसकी मस्ती एक अनदेखी सी साज़िश 

कुछ अनजान से पलों की सौगात लाए 
इन अंधियारों में उजालो के सपने  सजाए 

क्यू विश्वास जगाए एक नयी शुरुवात की 
क्यू  उम्मीद जगाये  सौगात की 

यूँ तो ये सिर्फ है मौसम की एक करवट 
जानूं मैं भी ये नहीं है मेरे हसरतो की  सूरत 

पर न जाने क्युं बारिश 
राहत देती है पहले प्यार के एहसास सा 
सुकून देती है माँ की गोद में आराम सा 
उम्मीद देती है अमावस  के बाद खिले चाँद सा 

कुछ तो राज़ ज़रूर है इन बूंदों का 
जो भीनी सी ख़ुशी ये हर लैब पर दे जाए 
कुछ तो जादू है इसके अंदाज़ का 
जो चाहे-नचाहे हर दिल को छू जाए 

चलो आज मैं भी 
हो जाऊ इस साज़िश में शामिल 
गीतों से फिर समेत लूँ 
वो यादें जो हुई धूमिल 
बुन लू ख्वाबों का वो महल 
जो इस मौसम सा सायना हो 
एक ऐसे कल के इंतज़ार में गाऊ 
जो इस बारिश सा ही सुहाना हो 
||Sshree|| 

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