पहली बारिश की ये ठंडक
दे जाती है दिल पे अनदेखी सी दस्तक
ये मदमस्त फुहारें
दे जाती हैं दिल को बहारें
ना जाने क्या कहती है ये बारिश
क्यों लगती है इसकी मस्ती एक अनदेखी सी साज़िश
कुछ अनजान से पलों की सौगात लाए
इन अंधियारों में उजालो के सपने सजाए
क्यू विश्वास जगाए एक नयी शुरुवात की
क्यू उम्मीद जगाये सौगात की
यूँ तो ये सिर्फ है मौसम की एक करवट
जानूं मैं भी ये नहीं है मेरे हसरतो की सूरत
पर न जाने क्युं बारिश
राहत देती है पहले प्यार के एहसास सा
सुकून देती है माँ की गोद में आराम सा
उम्मीद देती है अमावस के बाद खिले चाँद सा
कुछ तो राज़ ज़रूर है इन बूंदों का
जो भीनी सी ख़ुशी ये हर लैब पर दे जाए
कुछ तो जादू है इसके अंदाज़ का
जो चाहे-नचाहे हर दिल को छू जाए
चलो आज मैं भी
हो जाऊ इस साज़िश में शामिल
गीतों से फिर समेत लूँ
वो यादें जो हुई धूमिल
बुन लू ख्वाबों का वो महल
जो इस मौसम सा सायना हो
एक ऐसे कल के इंतज़ार में गाऊ
जो इस बारिश सा ही सुहाना हो
||Sshree||
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